अजमेर डेयरी फाटक (एलसी-2) पर बन रहा आरओबी पिछले 11 साल से अधूरा है और अब इसकी लागत 19.07 करोड़ रुपए बढ़ गई है। फिलहाल काम पूरा होने के आसार भी नजर नहीं आ रहे। रेलवे ने निर्माण एजेंसी आरएसआरडीसी के बूस्टिंग गर्डर रिजेक्ट कर दिए हैं, जिससे परियोजना और अटक गई है। अब कंपनी तीसरी बार नए गर्डर की खरीद के लिए टेंडर करेगी। खरीद, रेलवे निरीक्षण और साइट पर असेंबलिंग में कम से कम 6 महीने लगेंगे। यह आरओबी 2015 से निर्माणाधीन है।
शुरुआत में 27 करोड़ रुपए स्वीकृत हुए थे और काम 2019-20 तक पूरा होना था, लेकिन भूमि विवाद के चलते ठेकेदार ने काम छोड़ दिया। इसके बाद कोविड-19 के दौरान दो साल तक काम बंद रहा। दूसरी बार 38 करोड़ का टेंडर किया गया, लेकिन टेंडर प्रीमियम नहीं आया। अब लागत बढ़कर 46.07 करोड़ रुपए हो गई है। इसमें 5-6 करोड़ रुपए गर्डर खरीद पर ही खर्च होने हैं, जबकि संशोधित स्वीकृति अभी तक जारी नहीं हुई। अधूरा पड़ा अजमेर डेयरी आरओबी का काम।
जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो: विधायक अनिता भदेल ने हाल ही डिप्टी सीएम दिया कुमारी को अजमेर डेयरी फाटक की ड्राइंग डिजाइन में बार-बार बदलाव तथा प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति में देरी की जानकारी दी। साथ ही प्रोजेक्ट के बढ़े हुए बजट की स्वीकृति जारी करने तथा प्रोजेक्ट की निर्माण लागत बढ़ने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। रेलवे ने आरओबी के लिए मंगवाए गए गर्डर रिजेक्ट कर दिए हैं।
गर्डर अब दोबारा खरीदे जाएंगे। उच्चस्तर पर जानकारी दे दी गई है। नए सिरे से टेंडर लगाया जाएगा। इसमें 6 महीने लग सकते हैं। -राजेन्द्र कुमार मीना, पीडी आरएसआरडीसी अजमेर रेलवे ने गर्डर डिजाइन में बदलाव कर री-डिजाइन कराया। क्यूएपी और डब्ल्यूपीएस टेस्टिंग तथा निरीक्षण के बाद पहले से मंगवाए गए गर्डर रिजेक्ट कर दिए गए।
अब साइट पर पड़े ये गर्डर कबाड़ के रूप में बेचे जाएंगे, जिससे लागत और बढ़ेगी। रेलवे लाइन के दोनों ओर आरएसआरडीसी ने स्लैब तैयार कर रखे हैं। 6 साल से फाटक बंद, लोगों की परेशानी बढ़ी: आरओबी और अंडरपास निर्माण के कारण पिछले करीब 6 साल से रेल फाटक बंद है। कंचन नगर, दौराई, खानपुरा, तबीज़ी सहित आसपास के हजारों लोग प्रभावित हैं। बड़े वाहनों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।




