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नेपाल की टेक्नोलॉजी, बिहार के किसानों के लिए जुगाड़, खेत में लाखों का काम कौड़ियों में करता है ये यंत्र

पूर्णिया. पूर्णिया जिला के ठाडा ग्राम के किसान राजेश कुमार चार एकड़ में खेती करते हैं. उन्हें अपने खेत की जुताई के लिए भाड़े पर दूसरों का ट्रैक्टर लेना पड़ता था और फिर अपने खेत की जुताई करते थे. वहीं किराए का ट्रैक्टर सही तरह से खेतों की गहरी जुताई नहीं करता था जिस कारण खेत में लगी फसल का उत्पादन भी कम होता है लेकिन यह नेपाली जुगाड़ से वह अपने खेत की गहरी जुताई कर बम्पर उत्पादन ले रहे हैं.

आपने एक कहावत जरूर सुनी होगी कि ‘देखन में छोटन लगे लेकिन घाव करे गंभीर.’ दरअसल, जहां लोग खेती करने के लिए लाखों रुपए लगाकर ट्रैक्टर खरीदते है महंगे किराया देकर खेत की जुताई करते हैं. जिससे लागत अधिक और मुनाफा कम होता है. लेकिन पूर्णिया के किसान राजेश कुमार अपने 4 एकड़ खेती के लिए अब भाड़े की ट्रैक्टर नहीं लेते हैं और जुगाड़ तकनीक से जुताई कर सालाना 1 लाख से अधिक रुपये बचा रहे हैं.

25 हजार रुपए में नेपाल से खरीद कर लाए थे ट्रैक्टर
पूर्णिया जिला के किसान राजेश कुमार कहते हैं कि उन्होंने 5 साल पहले अपने किसी दोस्तों से संपर्क कर नेपाल से यह जुगाड़ ट्रैक्टर मंगवाया था. उस समय यह ट्रैक्टर महज ₹25000 रुपये में खरीदकर नेपाल से बिहार लेकर आये और अपने खेत में खेती करने लगे. उन्होंने कहा कि वह अपने चार एकड़ खेत में अलग-अलग तरह की सब्जियों की खेती करते हैं. वहीं उन्होंने कहा कि यह ट्रैक्टर बड़े-बड़े ट्रैक्टर को पीछे छोड़ सकता है. यह ट्रैक्टर देखने में भले ही छोटा है लेकिन काम बड़े-बड़े करता है. इस ट्रैक्टर की मदद से खेत में आसानी से गहरी और अच्छी जुताई कर बेहतर उत्पादन करते हैं.मात्र 1 लीटर प्रति घंटा तेल की खपत
वहीं उन्होंने कहा कि यह जुगाड़ ट्रैक्टर 2 घंटे में 1 एकड़ खेत की आसानी से जुताई कर सकता है और 1 लीटर प्रति घंटा तेल की खपत करता है. जहां कहीं भी खेत में रास्ते नहीं होते वहां यह ट्रैक्टर आसानी से चला जाता है. जबकि बड़ा ट्रैक्टर को ले जाना काफी मुश्किल होता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि बिहार सरकार को ऐसी ऐसी छोटी तकनीक भी किसानों को उपलब्ध करानी चाहिए.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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