कड़ाके की ठंड में जहां चलते इंसानों की कुल्फी जम रही है, वहां जानवरों का क्या हाल हो रहा होगा सोचना जरूरी है। और फिर ठंड भी कहां की राजस्थान की। जहां रात की ठंड बर्दाश्त करना मुश्किल ही नहीं नमुमकिन हो रहा है। इसीलिए राजस्थान में कड़ाके की ठंड बढ़ने के साथ ही जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में जानवरों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। ठंड से बचाने के लिए जानवरों के बाड़ों और रात के शेल्टर में हीटर लगाए गए हैं। इसके साथ ही जानवरों के खाने में भी बदलाव किया गया है, ताकि वे सर्दी के मौसम में स्वस्थ रहें।
पार्क प्रशासन के अनुसार, ठंड की वजह से जानवरों को बीमारियों से बचाने के लिए पहले से तैयारी की गई है। सभी जानवरों को अतिरिक्त पोषण दिया जा रहा है और उनके रहन-सहन पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि उन्हें किसी तरह की परेशानी न हो
सीनियर वेटरनरी डॉक्टर डॉ. अरविंद माथुर ने बताया कि बाघ, शेर और तेंदुए जैसे मांसाहारी जानवरों को उनके आम खाने के साथ चिकन दिया जा रहा है। छोटे बाघ और शेर के शावकों का खास ध्यान रखा जा रहा है और उन्हें चिकन के साथ चिकन सूप भी दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सभी जानवरों के शेल्टर में हीटर लगाए गए हैं और उन्हें विटामिन व मिनरल सप्लीमेंट भी दिए जा रहे हैं।
डॉ. माथुर के मुताबिक, भालुओं को खजूर, शहद, दूध और अंडे दिए जा रहे हैं। हाल ही में लाए गए हिमालयन काले भालू को ब्रेड, सेब और शहद खिलाया जा रहा है। भेड़िए, लकड़बग्घे और सियार को रोजाना चिकन और अंडे दिए जा रहे हैं। ऊदबिलाव और दरियाई घोड़े को गाजर, सेब और केला दिया जा रहा है, जबकि मगरमच्छ और घड़ियाल के लिए मछलियों की मात्रा बढ़ा दी गई है।
सर्दी में किए जानवरों के लिए खास इंतजाम
उन्होंने बताया कि हिरणों के बाड़ों में नमक की सिल्ली रखी गई है और उन्हें हरा चारा, चना दाल और गाजर खिलाई जा रही है। सभी जानवरों को ठंड से बचाने के लिए डीवॉर्मिंग की गई है और जरूरत के अनुसार कैल्शियम व अन्य पोषक तत्व दिए जा रहे हैं। पार्क में सभी जानवरों पर दिन-रात निगरानी रखी जा रही है, ताकि सर्दी में वे सुरक्षित और स्वस्थ रह सकें।





