मानसून के अलग-अलग मिजाज के कारण बांद्राभान संगम पर इन दिनों प्रकृति का एक अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। यहां मिलने वाली दो नदियों- नर्मदा और तवा के पानी का रंग पूरी तरह जुदा नजर आ रहा है।
एक तरफ नर्मदा का पानी मटमैला है, तो दूसरी तरफ तवा नदी का पानी बिल्कुल साफ और नीला है। बीते दिनों बारिश थमने से तवा बांध के गेट नहीं खोले गए। बांध में पानी ठहरा रहने से उसकी सारी मिट्टी और गाद तलहटी में बैठ गई। नतीजतन, आगे बहकर आ रहा पानी बिल्कुल छना हुआ और साफ नीला है।
विज्ञान का जादू: शियर लेयर संगम स्थल पर दोनों नदियों का पानी आपस में तुरंत मिक्स नहीं होता। तवा के साफ पानी और नर्मदा के गाद वाले पानी के तापमान और घनत्व में बड़ा अंतर है। विज्ञान की भाषा में इसे शियर लेयर कहा जाता है। यही वजह है कि दोनों पानी के बीच एक स्पष्ट विभाजक रेखा (एक बॉर्डर की तरह) साफ नजर आती है।
क्यों जुदा हैं दोनों के रंग नर्मदा का मटमैलापन: मंडला और जबलपुर (ऊपरी हिस्सों) में तेज बारिश के कारण मिट्टी का कटाव हुआ है। भारी मात्रा में गाद (सिल्ट) बहकर आने से नर्मदा का पानी मटमैला हो गया है।





