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1.47 करोड़ कमाने वाले सोम कमला आंबा को ठेकेदार की प्रतीक्षा, 62 में 28 तालाबों की बोली

मछली पालन को बढ़ावा देने और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से पंचायतों और जिला परिषदों से मछली पालन ठेकों का अधिकार अब मत्स्य विभाग को सौंपा है। लेकिन, नई व्यवस्था की शुरुआत ही चुनौतियों से घिरती नजर आ रही है।

जिले के सबसे बड़े और सर्वाधिक राजस्व देने वाले सोम कमला आंबा बांध सहित कई प्रमुख जलाशयों को अब तक ठेकेदार नहीं मिल पाए हैं। मत्स्य विभाग ने 13 मई को सी और डी श्रेणी के 62 तालाबों के लिए निविदाएं जारी की। इनमें से केवल 28 तालाबों पर ही बोली प्राप्त हुई। जबकि, 34 जलाशयों के लिए कोई भी इच्छुक ठेकेदार सामने नहीं आया। इन 28 तालाबों की नीलामी से विभाग को करीब 8 से 9 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ।

शेष जलाशयों के लिए अब पुनः टेंडर जारी किए गए हैं। विभागीय जानकारी के अनुसार जिले में ए श्रेणी के 7 तथा बी श्रेणी के 9 प्रमुख जलाशय हैं। ए श्रेणी में 5 लाख रुपए से अधिक और बी श्रेणी में 50 हजार से 5 लाख रुपए तक की वार्षिक राजस्व क्षमता वाले जलाशय शामिल हैं। इनकी निविदा और स्वीकृति प्रक्रिया मत्स्य निदेशालय जयपुर स्तर से ऑनलाइन की जाएगी।

^शेष जलाशयों के लिए पुनः टेंडर जारी किए गए हैं। 62 तालाबों में से 28 पर बोली प्राप्त हुई है। नई व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और राजस्व में भी वृद्धि होगी।

– चाहत सेवक, सहायक मत्स्य अधिकारी।

वित्तीय वर्ष 2025-26 में जिले के 19 प्रमुख जलाशयों से मत्स्य विभाग को उल्लेखनीय आय हुई थी। इनमें सबसे अधिक 147.03 लाख रुपए का राजस्व सोम कमला आंबा बांध से प्राप्त हुआ। इसके अलावा पूंजपुर से 14.98 लाख, बोड़ीगामा से 11.30 लाख, लोडेश्वर से 8.01 लाख, बनकोड़ा से 3 लाख तथा गलियाना से 2.07 लाख रुपए की आय हुई थी। इसके बावजूद इस बार सोम कमला आंबा सहित कई बड़े जलाशयों पर बोलीदाता नहीं मिलना विभाग के लिए चिंता का विषय बन गया है। जल संसाधन विभाग से मत्स्य विभाग को हस्तांतरित बांधों, एनिकटों और जलाशयों में अब मछली पालन के ठेके ग्राम पंचायत या जिला परिषद के माध्यम से नहीं होंगे। पूरी प्रक्रिया सीधे मत्स्य विभाग के नियंत्रण में रहेगी। नई व्यवस्था के तहत 50 हजार रुपए तक की वार्षिक राशि वाले ठेके जिला स्तर पर स्वीकृत किए जाएंगे, जबकि इससे अधिक राशि वाले ठेकों का अनुमोदन मत्स्य निदेशालय जयपुर से होगा।

विभाग का दावा है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी व राजस्व में वृद्धि होगी। सी और डी श्रेणी के जलाशयों में बोली नहीं आने पर विभाग ने एडवर्ड तालाब और लोअर घोड़ी जलाशय को मत्स्यजीवी सहकारी समितियों को रिजर्व प्राइस पर आवंटित किया है। इससे स्थानीय मछुआरों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। जिले में वर्तमान में 88 जलाशयों में मत्स्य पालन गतिविधियां संचालित हैं। इनमें से 19 जलाशय ठेके पर हैं, जबकि शेष का संचालन विभाग द्वारा किया जा रहा है। वर्ष 2025-26 में जिले को 4000 मीट्रिक टन मत्स्य उत्पादन का लक्ष्य मिला था। 15 फरवरी तक 3760 मीट्रिक टन उत्पादन हो चुका था, जो लक्ष्य का 94 प्रतिशत है।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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