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एक बार लगाएं, 70 साल तक पैदावार, खेत की मेड़ पर ही इस फल का पेड़ लगाकर हो जाएंगे मालामाल

आज के समय में किसान पारंपरिक खेती से हटकर नकदी फसलों की ओर तेजी से रुख कर रहे हैं. गेहूं, धान और सोयाबीन जैसी फसलों के साथ अब कई किसान ऐसी खेती की तलाश में हैं, जिससे कम लागत में ज्यादा मुनाफा मिल सके. यही वजह है कि अब पढ़े-लिखे युवा भी खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं और किसानों को कमाई के नए रास्ते दिखा रहे हैं.

खेती में सबसे बड़ी समस्या मौसम और सिंचाई की होती है. अगर समय पर पानी न मिले या मौसम खराब हो जाए तो पूरी फसल खराब हो सकती है. ऐसे में खजूर की खेती किसानों के लिए एक अच्छा विकल्प बनकर सामने आ रही है. खास बात ये कि खजूर का पौधा एक बार लगाने के बाद कई सालों तक लगातार उत्पादन देता है और इससे किसानों को लाखों की कमाई भी हो सकती है.

70-80 साल तक पैदावार
भारत में ज्यादातर किसान गेहूं, धान या सब्जियों की खेती तक ही सीमित रहते हैं. लेकिन, खजूर की खेती एक ऐसी फसल है, जिसे एक बार लगाने के बाद करीब 70 से 80 साल तक पैदावार मिलती रहती है. राजस्थान, गुजरात और देश के कुछ अन्य हिस्सों में किसान इस खेती से हर साल लाखों कमा रहे हैं

कृषि सलाहकार नरेंद्र पटेल बताते हैं कि खजूर एक ऐसा फल है, जिसकी मांग पूरे साल रहती है. खासकर रमजान में इसकी मांग काफी बढ़ जाती है. भारत में खजूर की खपत बहुत ज्यादा है, लेकिन उत्पादन कम होने के कारण इसे विदेशों से आयात करना पड़ता है. यही वजह है कि अगर किसान इसकी खेती करते हैं तो उन्हें बाजार में अच्छा दाम मिल सकता है. खजूर का पौधा लगाने के बाद करीब 4 से 5 साल में फल देना शुरू कर देता है. फिर कई दशकों तक उत्पादन देता रहता है. इसमें पानी की जरूरत भी अपेक्षाकृत कम होती है. रखरखाव भी ज्यादा नहीं करना पड़ता.

खेती के लिए कैसी मिट्टी और जलवायु चाहिए?
खजूर की खेती के लिए गर्म और शुष्क जलवायु सबसे उपयुक्त मानी जाती है. राजस्थान, गुजरात, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में इसकी खेती अच्छे परिणाम देती है. मिट्टी की बात करें तो दोमट या रेतीली मिट्टी इसके लिए बेहतर है. खेत में जलभराव नहीं होना चाहिए, क्योंकि ज्यादा पानी से पौधों की जड़ें सड़ सकती हैं. मिट्टी का Ph स्तर 7 से 8 के बीच होना चाहिए. कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पौधे लगाने से पहले मिट्टी की जांच जरूर करानी चाहिए.

सही किस्म का चुनाव जरूरी
भारत में खजूर की कई किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन सही किस्म का चुनाव करना बहुत जरूरी है. बरही, खदरावी, मेडजूल और खलास जैसी किस्में खेती के लिए अच्छी मानी जाती हैं. अगर किसान व्यावसायिक स्तर पर खेती करना चाहते हैं तो बरही और मेडजूल किस्म ज्यादा मुनाफा देती हैं, क्योंकि इनकी बाजार में मांग अधिक होती है. विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पौधे हमेशा विश्वसनीय नर्सरी से ही खरीदें और टिशू कल्चर वाले पौधे लेना ज्यादा फायदेमंद रहता है

कैसे लगाएं पौधे?
खजूर के पौधे फरवरी&मार्च या जुलाई-अगस्त में लगाए जा सकते हैं. एक एकड़ जमीन में करीब 60 से 70 पौधे लगाए जा सकते हैं. पौधों के बीच 6 से 8 मीटर की दूरी रखना जरूरी होता है, ताकि उन्हें पर्याप्त धूप और जगह मिल सके. गड्ढे की गहराई लगभग 3 फीट होनी चाहिए और उसमें गोबर की खाद व मिट्टी का मिश्रण भरना चाहिए. पौधा लगाने के बाद हल्की सिंचाई करना जरूरी है. शुरुआती एक-दो साल पौधों को नियमित पानी देना पड़ता है, लेकिन बाद में खजूर का पेड़ काफी मजबूत हो जाता है.

फूल आते समय जरूर डालें ये चीज
खजूर के पौधों को ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती, लेकिन फल बनने के समय नियमित सिंचाई जरूरी होती है. ड्रिप सिंचाई प्रणाली इसके लिए सबसे बेहतर मानी जाती है, क्योंकि इससे पानी की बचत होती है. पौधों को पर्याप्त नमी मिलती रहती है. खाद के रूप में साल में दो बार गोबर की खाद या कम्पोस्ट देना चाहिए. फूल आने से पहले NPK खाद भी दी जा सकती है. कीट और बीमारियों से बचाव के लिए समय-समय पर जैविक कीटनाशकों का छिड़काव करना चाहिए.

समझिए खजूर से कमाई का गणित
एक पूर्ण विकसित खजूर का पेड़ साल में करीब 40 से 80 किलो तक फल दे सकता है. बाजार में खजूर की कीमत किस्म और गुणवत्ता के अनुसार 300 से 800 रुपये प्रति किलो तक होती है. अगर एक एकड़ में 60 पेड़ लगाए जाएं और हर पेड़ से औसतन 50 किलो फल मिले तो करीब 3000 किलो उत्पादन हो सकता है. अगर इसे औसतन 400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जाए तो सालाना करीब 12 लाख रुपये तक की कमाई संभव है. शुरुआती निवेश करीब 3 से 4 लाख रुपये तक आता है, लेकिन एक बार पौधे फल देना शुरू कर दें तो कई सालों तक किसानों को अच्छी आमदनी मिलती रहती है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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