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सुप्रीम कोर्ट ने SEZ के लिए अडानी पोर्ट्स को अलॉट की गई 108 हेक्टेयर गौचर ज़मीन की रिकवरी का आदेश रद्द किया

सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में गुजरात हाईकोर्ट का आदेश रद्द किया, जिसमें राज्य को कच्छ में 108-22-35 हेक्टेयर ज़मीन वापस लेने का निर्देश दिया गया था, जिसे स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के विकास के लिए अडानी पोर्ट्स को अलॉट किया गया।

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस अतुल चंदुरकर की बेंच ने इस मामले को नए सिरे से विचार करने के लिए गुजरात हाईकोर्ट को वापस भेज दिया।

यह मामला 2011 में दायर एक PIL से शुरू हुआ, जिसमें कच्छ के गोयारसमा, नविनाल और लुनी गांवों में गौचर के लिए ग्राम पंचायतों को पहले अलॉट की गई ज़मीन को स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन के विकास के लिए अडानी पोर्ट्स को अलॉट करने को चुनौती दी गई। शिकायत यह थी कि पंचायतों के पास गौचर की ज़मीन सीमित है और इसमें और कमी से कमी वाले क्षेत्र के निवासियों पर असर पड़ेगा।

24 सितंबर, 2014 को हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाओं के लंबित रहने के दौरान, सरकार ने स्थिति को सुधारने के लिए कदम उठाए। नविनाल गांव के मामले में डिप्टी कलेक्टर, कच्छ ने गौचर के लिए 387 हेक्टेयर और 80 आर सरकारी ज़मीन अतिरिक्त दी थी। लुनी गांव के लिए भी ऐसे ही कदम उठाए गए और हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि गोयारसमा के लिए भी ऐसे ही कदम उठाए जाएं।

हाईकोर्ट ने PIL का निपटारा करते हुए डिस्ट्रिक्ट इंस्पेक्टर ऑफ लैंड रिकॉर्ड्स (DILR) को नविनाल और लुनी को अलॉट की गई गौचर ज़मीन की माप करने और तय समय सीमा के भीतर कब्ज़ा सौंपने का निर्देश दिया।

हालांकि, राज्य के अनुरोध पर हाईकोर्ट ने बाद में निपटारे के आदेश को वापस लिया और DILR को गौचर ज़मीन की माप करने और प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश जारी किया।

19 अप्रैल, 2024 को हाईकोर्ट ने कहा कि इस बारे में कोई स्पष्टता नहीं है कि राज्य नविनाल गांव की गौचर ज़मीन की कमी को कैसे पूरा करेगा, जिसे 2005 में मुंद्रा पोर्ट/SEZ के लिए अलॉट किया गया था। कोर्ट ने कहा कि कलेक्टर, कच्छ-भुज के 15 जुलाई, 2005 के आदेश के तहत मुंद्रा पोर्ट और SEZ के लिए 276.05 एकड़ गौचर ज़मीन अलॉट की गई। इसमें आगे बताया गया कि राज्य के हलफनामे के अनुसार, जानवरों की आबादी को देखते हुए कुल ज़रूरी गौचर ज़मीन 320 एकड़ थी, यानी 129-50-08 हेक्टेयर, जबकि नविनाल में उपलब्ध ज़मीन सिर्फ़ 17-42-14 हेक्टेयर थी। राज्य के हलफनामे में यह भी कहा गया कि अडानी पोर्ट्स ने 38-48-85 हेक्टेयर ज़मीन वापस करने का भरोसा दिलाया था, लेकिन वह भी उपलब्ध ज़मीन के साथ मिलकर ज़रूरत को पूरा नहीं कर पाएगी।

इसके बाद 04 जुलाई, 2024 को राज्य ने प्रस्ताव जारी कर अडानी पोर्ट्स से नविनाल में 108 हेक्टेयर ज़मीन वापस लेने की मंज़ूरी दी। हाईकोर्ट ने विवादित आदेश में अधिकारियों को इस प्रक्रिया को कानून के अनुसार पूरा करने का निर्देश दिया। अडानी पोर्ट्स ने हाई कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ़ यह अपील दायर की।

सुप्रीम कोर्ट ने अब 05 जुलाई, 2024 का आदेश रद्द किया, जिसमें ज़मीन वापस लेने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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