शिवपुरी. मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में किसान अब परंपरागत खेती से हटकर बंजर, पथरीली जमीन और खेत की बहगड़ों में भी खेती कर आमदनी बढ़ा रहे हैं. जिले के कई किसानों ने ऐसी फसल अपनाई है, जिसमें न खाद की जरूरत है और न नियमित सिंचाई की. यह फसल एक बार लगाने पर 2 से 3 साल तक लगातार आमदनी देती है और साल में दो बार उत्पादन होता है. खास बात यह है कि जहां पानी की भारी कमी है या जमीन अनुपजाऊ मानी जाती है, वहां भी यह फसल बेहतर परिणाम दे रही है. इससे किसानों की लागत बेहद कम और मुनाफा स्थिर बना हुआ है. इस फसल की बाजार में अच्छी मांग है, खासकर इसके औषधीय गुणों के कारण. हम बात कर रहे हैं अरंडी की. शिवपुरी के किसानों के अनुसार, अरंडी का फल स्थानीय लोगों और दवा कंपनियों द्वारा खरीदा जाता है. वर्तमान में इसका बाजार भाव 40 से 50 रुपये प्रति किलो तक चल जाता है.
कम लागत में तैयार होने वाली अरंडी की फसल किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो रही है. उत्पादन साल में दो बार होने से किसानों को नियमित नकद आय मिलती रहती है. यही वजह है कि अब युवा किसान भी इस खेती की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
कहीं भी उगाया जा सकता है पौधा
अरंडी फसल की सबसे बड़ी खासियत है कि इसे बंजर, ऊबड़-खाबड़ और पथरीली जमीन पर भी आसानी से लगाया जा सकता है. जहां परंपरागत फसलें पानी और उपजाऊ मिट्टी के अभाव में नष्ट हो जाती हैं लेकिन यह फसल बिना किसी देखभाल के तैयार हो जाती है. खेत की मेड़, बहगड़ और अनुपयोगी पड़ी जमीन का उपयोग कर किसान अतिरिक्त आमदनी कमा सकते हैं. खाद, कीटनाशक और सिंचाई पर खर्च न होने से किसानों की आर्थिक जोखिम भी बेहद कम हो जाती है.
किसानों की जुबानी
कि अरंडी का पौधा औषधीय गुणों से भरपूर है और खराब और पथरीली जमीन पर भी आसानी से लगाया जा सकता है. यह पौधा साल में 2 से 3 बार फल देता है. इसके लिए दवाई या खाद की जरूरत नहीं पड़ती. जहां पानी नहीं होता, वहां भी इसकी पैदावार अच्छी होती है. इसका फल 40 से 50 रुपये किलो तक बिक जाता है. जयकुमार यादव बताते हैं कि कई ऐसी जमीन होती हैं, जहां कोई फसल नहीं होती. अरंडी पौधे को लगाने के बाद खर्च न के बराबर होता है और 2 से 3 साल तक लगातार आमदनी मिलती है. फसल कुछ महीनों में फल देना शुरू कर देती है और पानी-खाद की चिंता बिल्कुल नहीं रहती. इसके पत्तों से गंभीर चोटों की सिंकाई की जाती है





