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पिछले वर्ष देश के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से 8 एनसीआर के, सिर्फ सर्दी नहीं पूरे साल दमघोंटू रहती है हवा

नई दिल्ली। सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) के एक नए विश्लेषण के अनुसार दिल्ली व एनसीआर के अन्य शहरों में प्रदूषण की स्थिति गंभीर बनी हुई है। पीएम2.5 हो या पीएम10 दोनों का स्तर यहां के शहरों में मानक से बहुत अधिक है।वर्ष 2025 में पीएम2.5 के आकलन के अनुसार दिल्ली देश का दूसरा और गाजियाबाद तीसरा सबसे प्रदूषित शहर है। 10 प्रदूषित शहरों में आठ एनसीआर के हैं। वहीं, दिल्ली, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में पीएम 10 का स्तर सबसे अधिक मिला है।

पीएम 2.5 स्तर के आकलन में बर्नीहाट (असम), दिल्ली और गाज़ियाबाद (उत्तर प्रदेश) क्रमशः 100माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर, 96 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर और 93माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर वार्षिक स्तर के साथ देश के शीर्ष तीन प्रदूषित शहर हैं।

वहीं, 10 प्रदूषित शहरों में नोएडा, गुरुग्राम, ग्रेटर नोएडा, भिवाड़ी, हाजीपुर, मुज़फ्फरनगर और हापुड़ शामिल हैं। पीएम10 के मामले में, दिल्ली 197 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर वार्षिक औसत के साथ सबसे ऊपर है। यह राष्ट्रीय मानक से तीन गुना है। गाजियाबाद (190 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर) और ग्रेटर नोएडा (188 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर) दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।

इससे पता चलता है कि इन शहरों में प्रदूषण की समस्या मौसमी नहीं, बल्कि वर्ष भर बनी रहती है। परिवहन, उद्योग और पावर प्लांट जैसे क्षेत्रों से होने वाले निरंतर उत्सर्जन के कारण यह समस्या होती है।

कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक एनसीएपी और 15वें वित्त आयोग के तहत 13,415 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसमें से 9,929 करोड़ (74 प्रतिशत) खर्च किए जा चुके हैं।

सड़क धूल प्रबंधन पर कुल खर्च का 68 प्रतिशत उपयोग हुआ, जबकि परिवहन पर 14 प्रतिशत, अपशिष्ट व बायोमास जलाने से रोकने के लिए 12 प्रतिशत और निगरानी पर तीन प्रतिशत खर्च किया गया। उद्योग, घरेलू ईंधन उपयोग, जनसंपर्क पर एक-एक प्रतिशत से कम राशि खर्च हुई है।

सीआरईए के एनालिस्ट मनोज कुमार का कहना है कि प्रदूषण रोकथाम को प्रभावी बनाने के लिए पीएम10 की तुलना में पीएम2.5 और उसके पूर्ववर्ती गैसों (एसओ₂ और एनओ₂) को प्राथमिकता देना होगा।

एनसीएपी के तहत गैर-अनुपालन शहरों की सूची को संशोधित करने, उद्योगों और पावर प्लांट के लिए सख्त उत्सर्जन मानक निर्धारित करने, सोर्स एप्रोर्शनमेंट अध्ययनों के आधार पर फंडिंग आवंटित करने के साथ ही क्षेत्रीय स्तर पर वायु प्रदूषण का समाधान करने के लिए एयरशेड-आधारित दृष्टिकोण अपनाना होगा।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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