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नक्सलियों को रोजगार और हम 7 साल से बेरोजगार”, मुख्यमंत्री जनदर्शन में फूटा अभ्यर्थियों का गुस्सा

रायपुर:सीएम जनदर्शन के दौरान आज एक बेहद भावुक और झकझोर देने वाला मामला सामने आया. छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (CAF) भर्ती 2018 की वेटिंग लिस्ट में शामिल सैकड़ों अभ्यर्थियों ने सरकार पर गंभीर सवाल खड़े किए. अभ्यर्थियों ने कहा कि एक तरफ नक्सलियों को सरेंडर पर रोजगार मिल रहा है, दूसरी तरफ हम 7 साल से बेरोजगार दर-दर भटक रहे हैं. नौकरी नहीं मिलने से टूट चुके अभ्यर्थियों ने चेतावनी दी है कि अगर अब भी फैसला नहीं हुआ, तो पूरे परिवार के साथ जल समाधि लेने को मजबूर होंगे.

सीएम जनदर्शन में पहुंचे पीड़ित अभ्यर्थी

नया रायपुर के तूता धरना स्थल पर 22 दिसंबर से अनिश्चितकालीन धरने पर CAF वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थी बैठे हैं. आज एक प्रतिनिधिमंडल मुख्यमंत्री निवास में आयोजित सीएम जनदर्शन कार्यक्रम में पहुंचा. यहां उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से मुलाकात कर अपनी पीड़ा रखी. मुख्यमंत्री ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन तो दिया, लेकिन कब तक समाधान होगा, इसकी कोई समय-सीमा नहीं बताई गई.

417 चयनित, फिर भी नौकरी नहीं!

अभ्यर्थियों ने बताया कि 2018 की CAF भर्ती में दौड़, लिखित परीक्षा और चयन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद 417 योग्य अभ्यर्थियों को सिर्फ वेटिंग लिस्ट में डालकर छोड़ दिया गया. 7 साल बीत जाने के बाद भी न तो नियुक्ति मिली और न ही कोई ठोस फैसला लिया गया.

बच्चों को लेकर सीएम से मिलने पहुंचीं महिलाएं

जनदर्शन में कई महिला अभ्यर्थी अपने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचीं. उन्होंने कहा कि नौकरी नहीं मिलने से परिवार की आर्थिक हालत बद से बदतर हो चुकी है, घर चलाना मुश्किल हो गया है और अब सब्र का बांध टूट चुका है.

“नक्सलियों को मौका, हमें सिर्फ इंतजार!

 

अभ्यर्थियों का दर्द छलक पड़ा उन्होंने कहा कि “सरकार नक्सलियों को सरेंडर कराकर रोजगार दे रही है, लेकिन हम जिन्होंने परीक्षा पास की, चयन सूची में आए, उन्हें 7 साल से सिर्फ इंतजार मिल रहा है। हम क्या इससे कम नागरिक हैं?”

परिवार सहित जल समाधि की चेतावनी

अभ्यर्थियों ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अब भी उनकी मांगों पर ठोस फैसला नहीं हुआ, तो वे पूरे परिवार के साथ जल समाधि लेने को मजबूर होंगे.
उन्होंने कहा कि वे मांग करते-करते थक चुके हैं, हर सरकार से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही.

ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकार 7 साल से इंतजार कर रहे इन बेरोजगार युवाओं की सुध लेगी, या यह मामला भी सिर्फ आश्वासन की फाइलों में दबकर रह जाएगा ?

 

Manoj Mishra

Editor in Chief

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