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सुकमा में नीली क्रांति की नई शुरुआत : मछली के साथ झींगा पालन बनेगा किसानों की समृद्धि का आधार

सुकमा। छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर स्थित सुकमा जिला अब   कृषि एवं मत्स्य पालन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की दूरदर्शी सोच और मार्गदर्शन में जिले में पारंपरिक धान खेती के साथ-साथ मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी क्रम में कलेक्टर के निर्देशन में सुकमा जिले की पांच ग्राम पंचायतों में झींगा पालन की शुरुआत कर नीली क्रांति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत भेलवापाल, झापरा, गोंगला, मुरातोंडा एवं गादीरास के कुल 17 तालाबों को झींगा पालन के लिए चयनित किया गया है। कृषकों को वैज्ञानिक पद्धति से प्रशिक्षण देने हेतु कृषि विज्ञान केंद्र, मुरातोंडा में एक विशेष डेमोंस्ट्रेशन यूनिट की स्थापना भी की गई है। हाल ही में मत्स्य विशेषज्ञ डॉ. संजय सिंह राठौर, मत्स्य विभाग के श्री डी.एल. कश्यप एवं एनआरएलएम जनपद सुकमा के संयोजक सहित विशेषज्ञ दल ने चयनित तालाबों का निरीक्षण कर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। अब तक जिले में कतला, रोहू, ग्रास कार्प एवं पेटला मछलियों का पालन किया जाता रहा है। झींगा पालन से स्थानीय कृषकों और मछुआरों की आय में वृद्धि होगी। यह पहल सुकमा को मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।

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Manoj Mishra

Editor in Chief

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