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पानी ही नहीं, घर भी ठंडा करती है मटके वाली मिट्टी! छत-दीवारें बनाने में करें इस्तेमाल, AC-कूलर के बिना घर रहेगा ठंडा

गर्मी बढ़ते ही घर को ठंडा रखने के लिए लोग AC-कूलर चलने लगते हैं. इसकी वजह से बिजली का बिल दोगुना बढ़ जाता है. लेकिन सोचिए, अगर घर को ठंडा रखने के लिए ना AC की जरूरत हो और ना ही कोई हाईटेक मशीन की तो कैसा होगा? इस सवाल के जवाब में हो सकता है आपके मन में भी एक सवाल उठे कि क्या ऐसा हो सकता है? अगर आ रहा है, तो इसका जवाब है बिल्कुल हो सकता है. जिस मिट्टी के मटके का पानी गर्मियों में अपने आप ठंडा हो जाता है, वही मिट्टी घर की छत, दीवार और फर्श को भी ठंडा रखने में मदद कर सकती है. अगर आप मटके वाली मिट्टी से घर बनाएं तो बहुत ही आसानी से आप अपने घर को ठंडा रख सकते हैं. इस मिट्टी का नाम है टेराकोटा

मिट्टी से बनी ये चीज भले ही आज आपको पुराने जमाने की लगे, लेकिन मॉडर्न आर्किटेक्चर में इसकी वापसी हो रही है. खास बात ये है कि टेराकोटा सिर्फ खूबसूरत नहीं दिखता, बल्कि ये जिस तरह से बनाया जाता है वो गर्मी को मैनेज करने में भी मदद करता है. यही वजह है कि आज कई सस्टेनेबल बिल्डिंग्स और मॉडर्न डिजाइन में इसका इस्तेमाल फिर से बढ़ रहा है.

आखिर क्या है टेराकोटा?
टेराकोटा असल में नेचुरल क्ले यानी मिट्टी से बनाया जाता है. मिट्टी को अलग-अलग शेप देकर उसे बहुत ज्यादा टेंपरेचर पर पकाया जाता है, जिससे वो मजबूत और टिकाऊ हो जाती है. इसमें सिंथेटिक मटेरियल की जरूरत नहीं होती और इसका बेसिक कच्चा माल नेचुरल मिट्टी ही है. यानी जिस मिट्टी को हमने कभी गांव-देहात के पुराने घरों, मटकों और बर्तनों तक सीमित समझ लिया था, वही आज सस्टेनेबल होम डिजाइन में दोबारा जगह बना रही है.मटके की तरह टेराकोटा भी देता है कूलिंग इफेक्ट
अब सवाल है कि आखिर मिट्टी घर को ठंडा कैसे रख सकती है? इसका जवाब टेराकोटा की पोरस यानी सूक्ष्म छिद्रों वाली बनावट में छिपा है. मिट्टी में मौजूद छोटे-छोटे छेद नमी को सोखने और धीरे-धीरे बाहर छोड़ सकते हैं. मटके में यही प्रोसेस पानी को ठंडा रखने में मदद करती है. टेराकोटा की टाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल भी इसी नेचुरल प्रॉपर्टी का फायदा उठाने के लिए किया जा सकता है. सही डिजाइन और वेंटिलेशन के साथ ये बिल्डिंग पर पड़ने वाली गर्मी को मैनेज करने में मदद कर सकता है.

छत पर लगाएं तो धूप की सीधी मार होगी कम
गर्मियों में घर की छत सबसे ज्यादा गर्म होती है और यही गर्मी धीरे-धीरे कमरों के अंदर पहुंचती है. ऐसे में छत पर टेराकोटा टाइल्स का इस्तेमाल करने से घर ठंडा रह सकता है.  टेराकोटा की टाइलें छत को कवर करके सीधी धूप और गर्म सरफेस के असर को कम करने वाले बिल्डिंग डिजाइन का हिस्सा बन सकती हैं. हालांकि इसका असर मौसम, छत के डिजाइन, इंसुलेशन और वेंटिलेशन पर भी निर्भर करता है.

दीवारों पर जाली की तरह करें इस्तेमाल 
टेराकोटा का इस्तेमाल सिर्फ टाइल के तौर पर ही नहीं होता. इससे जालीदार स्क्रीन और वॉल पैनल भी बनाए जाते हैं. इन स्क्रीन में छोटे-छोटे गैप होते हैं, जिससे हवा के आने-जाने की गुंजाइश रहती है. सही डिजाइन के साथ ऐसी स्क्रीन घर को धूप से बचाते हुए हवा के फ्लो को बनाए रखने में मदद कर सकती हैं. यानी दीवार पूरी तरह बंद करने के बजाय वो हवा और रोशनी के साथ काम करने वाली एक डिजाइनर लेयर बन जाती है. आपने पुराने ऐतिहासिक इमारतों में भी देखने को मिलता है.

फ्लोरिंग से लेकर वॉल पैनलिंग तक कई जगह इस्तेमाल
टेराकोटा का इस्तेमाल सिर्फ घर की छत तक सीमित नहीं है. इसे फ्लोरिंग, वॉल पैनलिंग, फसाड, जाली और डेकोरेटिव एलिमेंट्स में भी इस्तेमाल किया जाता है. खासकर उन घरों में जिन्हें लोग नेचुरल और अर्थी लुक चाहते हैं, वहां टेराकोटा इंटीरियर को एक अलग सुंदर लुक देता है. यानी ये सिर्फ ठंडक महसूस कराने वाले मटेरियल नहीं है, बल्कि घर की खूबसूरती बढ़ाने वाला डिजाइनर एलिमेंट भी है.

कंक्रीट और ग्लास के दौर में पीछे छूट गई थी ये देसी तकनीक
भारत में मिट्टी से बने घर और कंस्ट्रक्शन में इस्तेमाल होने वाली चीजें कोई नई बात नहीं हैं. अलग-अलग इलाकों में स्थानीय मौसम के हिसाब से मिट्टी, जाली, आंगन और नेचुरल वेंटिलेशन का इस्तेमाल लंबे समय से होता आया है. फिर कंक्रीट, ग्लास और मॉडर्न कंस्ट्रक्शन तकनीकों ने इनकी जगह ले ली. लोग अपने घरों को सुंदर और डिजाइनर बनाने के लिए इन चीजों का इस्तेमाल करने लगे. इसकी वजह से धीरे-धीरे टेराकोटा को भी पुराने जमाने की चीज समझा जाने लगा. लेकिन आज जब सस्टेनेबल आर्किटेक्चर, एनर्जी एफिशिएंसी और पैसिव कूलिंग की चर्चा बढ़ रही है, तो यही पुराने इंग्रेडिएंट्स नए डिजाइन के साथ वापस आ रही है.

अब लग्जरी रिसॉर्ट से मॉडर्न बिल्डिंग तक पहुंचा टेराकोटा
आज टेराकोटा को सिर्फ गांव के पुराने घरों से जोड़कर नहीं देखा जाता. आर्किटेक्ट्स इसका इस्तेमाल मॉडर्न फसाड, ऑफिस, रिसॉर्ट्स और सस्टेनेबल बिल्डिंग डिजाइन में भी कर रहे हैं. यानी टेराकोटा कहीं गया नहीं था. हमने बस उसे पुराने जमाने की चीज समझकर नजरअंदाज कर दिया था. अब वही मिट्टी मॉडर्न आर्किटेक्चर में नए अंदाज के साथ लौट रही है.AC का ऑप्शन नहीं, लेकिन घर को स्मार्ट तरीके से ठंडा रखने का हिस्सा
ये समझना जरूरी है कि टेराकोटा लगाने भर से घर AC की तरह ठंडा नहीं हो जाएगा. इसका फायदा सबसे ज्यादा तब मिल सकता है जब इसे सही वेंटिलेशन, शेडिंग, इंसुलेशन और बिल्डिंग डिजाइन के साथ इस्तेमाल किया जाए. यानी असली कहानी सिर्फ मिट्टी की नहीं, बल्कि ऐसे घर बनाने की है जो नेचुरल के साथ मिलकर गर्मी को मैनेज करें, हर वक्त मशीनों पर निर्भर न रहें. टेराकोटा की यही खासियत इसे पुराने मटके से निकालकर नए जमाने के सस्टेनेबल घर तक ले आई है.

Manoj Mishra

Editor in Chief

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