रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की विशेष अदालत ने 13 साल बाद फैसला सुना दिया है। अदालत ने मामले में सुनवाई पूरी करते हुए एनआईए द्वारा गिरफ्तार सभी 10 आरोपियों को दोषी ठहराया है। सजा को सुरक्षित रखते हुए आगामी 16 सितंबर को अंतिम फैसला और सजा सुनाने की तारीख तय की गई है। फैसले के आरोपियों की पैरवी कर रहे वकील अरविंद चौधरी ने कहा कि वे कोर्ट के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं वे फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
बता दें अंतिम बहस में शामिल होने के लिए सेंट्रल जेल जगदलपुर से 10 बंदियों को अदालत में लाया गया था। इससे पहले, अंतिम बहस पूरी होने के बाद फैसले की तारीख दो बार बदली गई थी। पहले निर्णय के लिए 31 अगस्त की तिथि तय की गई थी, जिसके बाद इसे बढ़ाकर 5 सितंबर का दिन तय किया गया। पांच सितंबर यानी शनिवार को सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया गया।
दोषी ठहराए गए आरोपियों के नाम
झीरम कांड में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से एक की मृत्यु हो चुकी है। कोर्ट ने बचे हुए सभी 10 आरोपियों को कसूरवार ठहराया है। दोषी ठहराए गए 10 आरोपियों में प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम उर्फ अयाता माड़कम, मुक्का मंडावी, मड़कामी देवा, कवासी कोसा, चौतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग व सुमित्रा शामिल है।
25 मई 2013 को हुआ था हमला
यह दर्दनाक घटना 25 मई, 2013 को घटी थी, जब प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की परिवर्तन यात्रा सुकमा से वापस लौट रही थी। दरभा क्षेत्र की झीरम घाटी में माओवादियों ने सुनियोजित तरीके से इस पूरे काफिले को निशाना बनाया था। माओवादियों के इस भीषण हमले में कुल 32 लोगों की मौत हुई थी। इस हमले में जान गंवाने वालों में प्रदेश कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा समेत कई प्रमुख चेहरे शामिल थे। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद अब एनआईए की विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को दोषी करार देकर मामले का पटाक्षेप किया है।
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