छत्तीसगढ़

जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर जोर

*कबीरधाम में विश्व स्तनपान सप्ताह के तहत हुई जागरूकता कार्यशाला*

*जन्म के पहले घंटे में स्तनपान और छह माह तक केवल मां का दूध पिलाने पर जोर*

कवर्धा, अगस्त 2026/ विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर शासकीय बालगृह जोराताल, कवर्धा के सभागार में जिला स्तरीय स्तनपान जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में गर्भवती एवं धात्री माताओं को स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूक करने के साथ मैदानी अमले को स्तनपान संबंधी प्रभावी परामर्श एवं व्यवहार परिवर्तन के लिए विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षित किया गया।

कार्यशाला में जन्म के पहले घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने, छह माह तक शिशु को केवल मां का दूध पिलाने तथा छह माह के बाद उचित पूरक आहार के साथ कम से कम दो वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने पर विशेष जोर दिया गया।

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी सुश्री चंचल यादव एवं परियोजना अधिकारी दशरंगपुर श्रीमती कृतिका सिंह ने विश्व स्तनपान सप्ताह के उद्देश्य, स्तनपान के महत्व और विभागीय भूमिका पर जानकारी दी। परियोजना अधिकारी कवर्धा श्रीमती विवेका हैरिस ने आंगनबाड़ी केन्द्रों की भूमिका, मातृ परामर्श तथा व्यवहार परिवर्तन संचार के संबंध में मार्गदर्शन दिया।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. सलील मिश्रा ने स्तनपान के वैज्ञानिक महत्व, शिशु को स्तनपान कराने की सही विधि तथा माताओं को आने वाली सामान्य समस्याओं और उनके समाधान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मां का दूध शिशु के लिए आवश्यक पोषण के साथ-साथ उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

कार्यशाला में महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी, पर्यवेक्षक, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्वास्थ्य विभाग के शिशु रोग विशेषज्ञ, एनआरसी प्रतिनिधि एवं मितानिन बहनों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर एवं खुली चर्चा के माध्यम से प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं और शंकाओं का समाधान किया गया।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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