मध्य प्रदेश का बालाघाट जिला एक ऐसा जिला है, जहां पर नदिया , पहाड़ और जंगल है. ऐसे में कई ऐसे टोले है और गांव है, जहां पर आदिवासी समुदाय के लोग अपना जीवन सदियों से बीता रहे हैं. ऐसे में प्रकृति के साथ जीवन जीना क्या होता है. वह आदिवासी बखुबी जानते हैं. बालाघाट के गढ़दा गांव के खड़े पहाड़ पर चढ़ रही थी, तब मच्छरों का आतंक ऐसा था कि चढ़ाई काफी मुश्किल हो गई थी.
उसी बीच हमारे पास आधुनिक दुनिया की वह व्यवस्था नहीं थी, जिससे मच्छरों को दूर भगाया जा सके. लेकिन हमारे साथ गढ़दा गांव के पूर्व सरपंच सहदेव अड़में थे. उनका जंगलों से गहरा नाता रहा है. ऐसे में उन्होंने जंगल के मोटे-
मोटे मच्छरों से बचने के लिए प्रकृति से जूड़ा नुस्खा बताया, जिसके इस्तेमाल से हमारे कठिन सफर में राहत भी मिली. जानिए क्या है वह जंगल का नुस्खा…
एक ऐसा पौधा जिससे भाग जाते हैं मच्छर
बालाघाट के जंगलों में एक नहीं बल्कि कई ऐसी वनस्पति है, जो शरीर को आने वाली समस्याओं से निजाद दिलाती है. एक ऐसा ही पेड़ है भेरिया का. भेरिया की पत्ती ही नहीं बल्कि उसका पूरा पेड़ ही औषधीय गुणों से भरा हुआ है. खास तौर इस पेड़ की पत्तियां है, जो औषधीय गुणों से भरपूर है. दरअसल, उस पत्ती की सुगंध मच्छरों को रास नहीं आती है. ऐसे में मच्छर उसकी सुगंध से ही दूर हो जाते हैं और कितने भी मच्छर हो वह भाग जाते हैं.जानिए कैसे करें इस्तेमाल
ग्रामीण अंचलों में आज भी इसका इस्तेमाल किया जाता है. दरअसल, इसकी पत्तियों को पास में रखने से ही मच्छर दूर भाग जाते हैं. गढ़दा निवासी कमलेश गगैये ने बताया कि आप इसका इस्तेमाल तीन तरह से कर सकते हैं. इसमें सामान्य तौर पर लोग अपने घरों की कवेली की छानी पर भेरिया पेड़ की डाल को खोच लेने से मच्छर दूर हो जाते हैं.
वहीं, दूसरा तरीका ये है कि आप भेरिया की पत्तियों को अच्छी तरह पीस लेते हैं. इसके लेप को शरीर पर लगा लेने से मच्छर काटते नहीं है. वहीं, अगर मच्छर काट भी ले तो उसके इंफेक्शन को दूर करता है. तीसरा तरीका यह है कि आप इसकी पत्तियों को सूखे पत्तियों या फिर पैरा यानी धान की पराली के साथ जलाने से उठने वाला धुआं भी मच्छरों को भगाने में मददगार साबित होता है. यह धुनी पशुशाला में भी जला सकते हैं. इससे मच्छरों से पशुओं को भी निजात देती है.
इसका लेप घांव में भी फायदेमंद
कमलेश बताते हैं कि ग्रामीण इसके लेप का इस्तेमाल कटे फटे या फिर घांव को भरने में करते हैं. वहीं, कई बार पशुओं को घाव में कीड़े लगने पर भी इसका इस्तेमाल करते हैं. इससे पशुओं को राहत मिलती है. ऐसे में भेरया की पत्तियां मानव ही नहीं बल्कि जीवों के लिए फायदेमंद है.
वहीं, दूसरा तरीका ये है कि आप भेरिया की पत्तियों को अच्छी तरह पीस लेते हैं. इसके लेप को शरीर पर लगा लेने से मच्छर काटते नहीं है. वहीं, अगर मच्छर काट भी ले तो उसके इंफेक्शन को दूर करता है. तीसरा तरीका यह है कि आप इसकी पत्तियों को सूखे पत्तियों या फिर पैरा यानी धान की पराली के साथ जलाने से उठने वाला धुआं भी मच्छरों को भगाने में मददगार साबित होता है. यह धुनी पशुशाला में भी जला सकते हैं. इससे मच्छरों से पशुओं को भी निजात देती है.
इसका लेप घांव में भी फायदेमंद
कमलेश बताते हैं कि ग्रामीण इसके लेप का इस्तेमाल कटे फटे या फिर घांव को भरने में करते हैं. वहीं, कई बार पशुओं को घाव में कीड़े लगने पर भी इसका इस्तेमाल करते हैं. इससे पशुओं को राहत मिलती है. ऐसे में भेरया की पत्तियां मानव ही नहीं बल्कि जीवों के लिए फायदेमंद है.





