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राम मंदिर दान चोरीः एसआईटी की रिपोर्ट में इस बार चंपत राय, अनिल मिश्रा के साथ गोविंददेव भी होंगे

श्रीराम मंदिर में चढ़ावा चोरी की जांच कर रही एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट पर बड़े- बड़े नपेंगे। सूत्रों के मुताबिक अंतिम रिपोर्ट में सभी की जवाबदेही तय की गई है। टीम अपनी रिपोर्ट शनिवार तक शासन को सौंप सकती है। अंतिम रिपोर्ट में कोई नए तथ्य सामने आने की उम्मीद नहीं है लेकिन इसमें चढ़ावा चोरी रोकने में नाकाम रहे लोगों के नाम का खुलासा तय माना जा रहा है। अंतिम रिपोर्ट में तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव रहे चंपत राय की भूमिका भी स्पष्ट हो सकती है। प्रारंभिक रिपोर्ट में एसआईटी ने सीधे तौर पर किसी की जिम्मेदारी तय नहीं की थी। अनिल मिश्रा के साथ ही कोषाध्यक्ष गोविंददेव की भूमिका भी खंगाली गई है।प्रारंभिक रिपोर्ट में विशेष जांच दल (एसआईटी) ने सीसीटीवी फुटेज के जरिए साफ कर दिया है कि अविनाश शुक्ला और मनीष यादव गणना कक्ष में नोटों की गड्डियां चोरी करते थे और बाकी इनकी मदद करते थे। दानपात्रों की चाबियां रमाशंकर यादव टिन्नू के कब्जे में रहती थी। इन्हें न तो ट्रस्ट की ओर से अधिकृत किया गया था न बैंक की ओर से। फिर भी सबसे प्रमुख कार्य का निर्वहन कर रहे थे। रिटायर बैंककर्मी सुभाष श्रीवास्तव गणना के प्रभारी जरूर थे लेकिन अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन नहीं किया।

एसआईटी ने दो बार अयोध्या का दौरा कर ट्रस्ट, मंदिर तथा बैंक की व्यवस्थाओं की जांच की है। उन कमियों को खोजा है, जिनकी वजह से चढ़ावा चोरी को अंजाम दिया गया। अंतिम रिपोर्ट में एसआईटी का फोकस भी चढ़ावा चोरी पर है। तीन दिन पहले हिन्दू धर्मसेना के अध्यक्ष संतोष दुबे के आरोपों पर वीडियो कान्फ्रेंसिंग के जरिए एसआईटी ने पूछताछ की। उनसे भी बयान के संबंध में दस्तावेजी साक्ष्य मांगे थे।

माना जा रहा है कि उनके बयान और उपलब्ध कराए गए साक्ष्य का भी एसआईटी विश्लेषण करेगी। यदि आरोप सही नहीं पाए गए तो भी जांच रिपोर्ट में उल्लेख कर सकती है क्योंकि इसके पहले बहुमूल्य वस्तुओं के चढ़ावे को लेकर सोशल मीडिया पर लगाए गए आरोपों की एसआईटी पड़ताल कर चुकी है। इनमें से ज्यादातर आरोप सही नहीं पाए गए।

अनिल मिश्रा की भूमिका स्पष्ट होगी

सूत्रों के मुताबिक, विस्तृत रिपोर्ट में एसआईटी गिरफ्तार आरोपियों के अलावा ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और एसबीआई की भूमिका और स्पष्ट कर सकती है। गणना एसओपी पर अनिल मिश्रा और बैंक के तत्कालीन चीफ मैनेजर योगेंद्र मिश्रा के हस्ताक्षर हैं। ट्रस्ट की 6 जुलाई की बैठक के बाद महासचिव रहे चंपत राय अपनी भूमिका साफ कर चुके हैं। वह एसआईटी को लिखे पत्र में बता चुके हैं कि उन्हें एसओपी की जानकारी 13 जून 2026 को तब हुई जब चोरी का खुलासा हो चुका था।

इसके पहले उन्हें जानकारी नहीं थी। एसओपी पर उनके हस्ताक्षर नहीं है जबकि ट्रस्ट के साथ हुए सभी तरह के अनुबंध पर उनके हस्ताक्षर हैं। चंपत राय ने ट्रस्टी अनिल मिश्रा पर ठीकरा फोड़ दिया। सवाल भी उठाया कि एसओपी को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों बरती गई। इससे माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में ट्रस्टी अनिल मिश्रा, बैंक और व्यवस्थागत खामियों का स्पष्ट उल्लेख एसआईटी कर सकती है। मंदिर व्यवस्था के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी साफ हो सकती है।

अनिल मिश्रा की भूमिका स्पष्ट होगी

सूत्रों के मुताबिक, विस्तृत रिपोर्ट में एसआईटी गिरफ्तार आरोपियों के अलावा ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और एसबीआई की भूमिका और स्पष्ट कर सकती है। गणना एसओपी पर अनिल मिश्रा और बैंक के तत्कालीन चीफ मैनेजर योगेंद्र मिश्रा के हस्ताक्षर हैं। ट्रस्ट की 6 जुलाई की बैठक के बाद महासचिव रहे चंपत राय अपनी भूमिका साफ कर चुके हैं। वह एसआईटी को लिखे पत्र में बता चुके हैं कि उन्हें एसओपी की जानकारी 13 जून 2026 को तब हुई जब चोरी का खुलासा हो चुका था।

इसके पहले उन्हें जानकारी नहीं थी। एसओपी पर उनके हस्ताक्षर नहीं है जबकि ट्रस्ट के साथ हुए सभी तरह के अनुबंध पर उनके हस्ताक्षर हैं। चंपत राय ने ट्रस्टी अनिल मिश्रा पर ठीकरा फोड़ दिया। सवाल भी उठाया कि एसओपी को लेकर इतनी जल्दबाजी क्यों बरती गई। इससे माना जा रहा है कि अंतिम रिपोर्ट में ट्रस्टी अनिल मिश्रा, बैंक और व्यवस्थागत खामियों का स्पष्ट उल्लेख एसआईटी कर सकती है। मंदिर व्यवस्था के लिए प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी साफ हो सकती है।

कोषाध्यक्ष गोविंददेव की भूमिका भी खंगाली

लखनऊ। एसआईटी ने अपनी जांच में तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि की भूमिका भी खंगाली है। ट्रस्ट के बायलॉज के मुताबिक कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारियों का आकलन किया है। टीम ने ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक वित्तीय प्रबंधन की स्थिति पर नजर दौड़ाई है। हालांकि कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरी साफ कर चुके हैं कि कोष में आने तक किसी पैसों की जिम्मेदारी उनकी नहीं है। कोष में आया धन सुरक्षित है और सही जगह इस्तेमाल हुआ है।नियम है कि ट्रस्ट के अध्यक्ष, महासचिव और कोषाध्यक्ष में से किन्हीं दो के मंदिर से जुड़े किसी भुगतान पर हस्ताक्षर होंगे। महाचिव रहे चंपत राय और कोषाध्यक्ष की जगह ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र भुगतान आदेश पर हस्ताक्षर कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक एसआईटी ने वित्त प्रबंधन से जुड़े विभन्न पहलुओं और अभिलेखों का सत्यापन किया है। पिछले दिनों अयोध्या दौरे के दौरान मंदिर ट्रस्ट भवन में रिकॉर्ड का सत्यापन किया था। यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अंतिम रिपोर्ट में कोषाध्यक्ष की भूमिका का उल्लेख किया गया है या नहीं। माना जा रहा है कि पूरी रिपोर्ट आने के बाद स्थिति साफ होगी।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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