खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के खैरागढ़ जिले में महतारी वंदन योजना में गड़बड़ी सामने आई है। एक व्यक्ति ने आवेदन फॉर्म में अपना ही नाम हितग्राही और पति, दोनों की जगह लिख दिया। इतनी बड़ी गलती होने के बाद भी आवेदन मंजूर हो गया और करीब 1 साल तक उसके खाते में योजना की राशि भी आती रही। दरअसल इस पूरे मामले का खुलासा आरटीआई कार्यकर्ता शिकायत के बाद हुआ। परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि हितग्राही से राशि की रिकवरी कर ली गई है। वहीं, हितग्राही का कहना है कि योजना शुरू होने के समय उसने पोर्टल की प्रक्रिया समझने और उसे जांचने के लिए आवेदन किया था। मामला ग्राम मुढ़ीपार का है।

दरअसल, मुढ़ीपार का रहने वाला तिलोक साहू सीएससी सेंटर चलाता है। उसने महतारी वंदन योजना के लिए आवेदन किया था। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार आवेदन सार्वजनिक पोर्टल के जरिए किया गया। आवेदन में हितग्राही का नाम तिलोक साहू और पति के नाम की जगह भी तिलोक साहू ही लिखा था। इसके बावजूद आवेदन पहले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और फिर सुपरवाइजर स्तर पर सत्यापित कर दिया गया। जबकि योजना का लाभ केवल पात्र महिलाओं को दिया जाता है।
योजना के नियमों के अनुसार आवेदन की जांच के बाद ही मंजूरी दी जाती है, लेकिन इस मामले में सामान्य जांच के दौरान भी यह नहीं देखा गया कि आवेदन करने वाला व्यक्ति पुरुष है और पति के नाम की जगह भी उसी का नाम दर्ज है।
आरटीआई कार्यकर्ता की शिकायत पर जांच
इस बीच आरटीआई कार्यकर्ता ने योजना के हितग्राहियों की सूची निकाली। सूची में उसे तिलोक साहू का नाम संदिग्ध लगा। इसके बाद उसने मामले की शिकायत संबंधित विभाग से की। इसके बाद जांच शुरू की गई। जांच के दौरान ऑनलाइन रिकॉर्ड खंगाले गए।
12 महीने तक मिला भुगतान, अब शुरू हुई रिकवरी
इसमें पता चला कि संबंधित खाते में महतारी वंदन योजना की राशि 12 महीने तक जमा की गई। हालांकि, एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना ने 3 जुलाई 2026 को बैंक को पत्र भेजकर 10 हजार रुपए शासन के खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए। रिकॉर्ड में 12 महीने तक भुगतान दिख रहा है, जबकि रिकवरी 10 हजार रुपए की गई है। इसे लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
आवेदन को परमानेंट होल्ड किया गया
मामला सामने आने के बाद संबंधित आवेदन को परमानेंट होल्ड पर डाल दिया गया। साथ ही योजना का लाभ छोडऩे (बेनिफिट सरेंडर) का रिक्वेस्ट भी मंजूर कर लिया गया।
हितग्राही से राशि वापस ली गई
इस मामले में परियोजना अधिकारी रंजना श्रीवास्तव ने बताया कि संबंधित हितग्राही से योजना की पूरी राशि वापस ले ली गई है। मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जानकारी रिकॉर्ड की जांच के बाद दी जाएगी।
तिलोक साहू ने दी यह सफाई
तिलोक साहू का कहना है कि योजना शुरू होने के समय पोर्टल की प्रक्रिया समझने और ट्रायल के उद्देश्य से उसने खुद आवेदन किया था। उसके मुताबिक उसके खाते में कुल 10 हजार रुपये आए थे, जिन्हें विभाग की कार्रवाई के बाद वापस जमा करा दिया गया है।
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