चेतना ने इंजीनियर बेटे के लिए लिखा, “जब वह बमुश्किल तीन साल का था तभी से उसके मन में इस बात को लेकर कभी कोई संदेह नहीं था कि वह बड़ा होकर क्या बनना चाहता है. वह उसी दृढ़ता के साथ कहता जो सिर्फ एक बच्चे में हो सकती है मैं इंजीनियर बनूंगा. वह अपने छोटे-छोटे हाथों में एक नन्हा सा पाना (रिंच) उठा लेता और पूरे आत्मविश्वास से घोषणा करता कि एक दिन वह एक नया स्कूटर बनाएगा. सात साल की उम्र में उसके सपने और बड़े हो गए. वह कारें डिजाइन करना चाहता था और गर्व से कहता था कि वह उनका नाम “MAK” रखेगा.”
बचपन से इंजीनियर बनना चाहते थे मयास कुंबले
मयास कुंबले की मां ने अपने पोस्ट में बताया कि उनका बेटा बचपन से ही इंजीनियर बनना चाहते थे. इंस्टाग्राम पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा, “माता-पिता होने के नाते हम बचपन के इन सपनों पर मुस्कुराते हैं और सोचते हैं कि आने वाला समय क्या लेकर आएगा, लेकिन आज उसे एक इंजीनियर के रूप में ग्रेजुएट होते देख मुझे एक बेहद खूबसूरत बात का अहसास हो रहा है. कभी-कभी बच्चे दुनिया के जानने से बहुत पहले ही यह जानते हैं कि वे वास्तव में कौन हैं”
उन्होंने आगे लिखा, “साल बीतते गए, कड़ी मेहनत हुई, रातों की नींदें उड़ीं और आईं, लेकिन उस छोटे लड़के ने कभी अपने सपने को हाथ से जाने नहीं दिया और आज उसने इसे पूरा कर दिखाया है. मेरा दिल गर्व, कृतज्ञता और भावनाओं से भरा हुआ है. तुम्हें हाथ में औजार लिए एक जिज्ञासु छोटे बच्चे से लेकर दिल में एक मकसद लिए एक इंजीनियर बनते देखना मेरे जीवन की सबसे बड़ी खुशियों में से एक रहा है.मुझे तुम पर बहुत गर्व है, मेरे बच्चे. तुमने सपना देखा उस पर विश्वास किया और उसे सच कर दिखाया. मैं इंजीनियर बनूंगा. कहने वाले उस छोटे लड़के ने अपना वादा निभाया.”
अनिल कुंबले ने बेटे के लिए क्या लिखा?
भारत के लिए 957 इंटरनेशनल विकेट लेने वाले महान अनिल कुंबले भी एक इंजीनियर रह चुके हैं. ऐसे में अपने बेटे को भी इंजीनियर बनते हुए देखना से लिए गर्व का पल है. बेटे की कामयाबी पर अनिल कुंबले ने लंबा-चौड़ा पोस्ट तो नहीं लिखा, लेकिन उन्होंने मयास के लिए एक सुंदर सा संदेश दिया. अनिल कुंबले ने अपने इंजीनियर बेटे के लिए लिखा, “मुझे तुम पर गर्व है, मेरे बेटे!! पिता के नक्शेकदम पर चल रहे हो… बधाई हो. इसे अपना बना लो!!





