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देश में पहली बार किसी ने पाई इच्छामृत्यु, गाजियाबाद के हरिश ने 13 साल के कोमा से पाई मुक्ति

नईदिल्ली ए। 13 साल से बिस्तर पर जीवन की जंग लड़ रहे गाजियाबाद के हरीश का मंगलवार को एम्स में निधन हो गया है। इसके साथ ही हरीश इच्छा मृत्यू पाने वाले देश के पहले व्यक्ति बन गए हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के इंस्टीट्यूट रोटरी कैंसर अस्पताल (आईआरसीएच) के पैलिएटिव केयर वार्ड में हरीश राणा ने अंतिम सांस ली।

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बता दें जुलाई 2010 में हरीश ने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया था। वर्ष 2013 में वह अंतिम वर्ष के छात्र थे। इसी दौरान अगस्त 2013 में रक्षाबंधन वाले दिन बहन से मोबाइल फोन पर बात करते हुए पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए थे। गंभीर रूप से घायल हरीश को तुरंत पीजीआई चंडीगढ़ में भर्ती कराया गया। बाद में दिसंबर 2013 में उसे दिल्ली के एलएनजेपी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि वह क्वाड्रिप्लेजिया से ग्रसित है। इस स्थिति में उसके हाथ-पैर पूरी तरह निष्क्रिय हो गए और वह जीवन भर बिस्तर पर रहने को मजबूर हो गए।

हरीश के असहनीय दर्द और शारीरिक अक्षमता के कारण माता-पिता ने दिल्ली हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की अपील की, जिसे 8 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। करीब आठ महीने बाद 11 मार्च 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने हरीश को इच्छामृत्यु (पैसिव यूथेनेशिया) की अनुमति दे दी। वह 14 मार्च को एम्स में एडमिट किए गए थे और तब से ही डॉक्टर उनके लाइफ स्पोर्ट सिस्टम को धीरे-धीरे हटा रहे थे। बीते करीब एक हफ्ते से तो उन्हें खाना-पानी भी नहीं दिया जा रहा था। इस दौरान केवल हरीश को दर्द और मानसिक तकलीफ से राहत देने के लिए दवाएं दी जा रही थीं। आखिरकार मंगलवार को उनका निधन हो गया।

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Manoj Mishra

Editor in Chief

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