तीनों बच्चों का और अपना ध्यान रखना.. इतना कहा और रोते हुए फोन काट दिया। वापस फोन लगाने की कोशिश की, लेकिन लगा नहीं। एक महीने से कोई संपर्क नहीं हुआ है। यह कहना है उस महिला का जिसका पति यूक्रेन में लापता है और परिवार उसकी सकुशल वापसी की उम्मीद लगाए हुए है।दरअसल ब्यावर जिले के जवाजा पंचायत समिति के ग्राम बियांखेड़ा काबरा निवासी युवक गोकुल सिंह (36) पुत्र मोती सिंह पिछले 1 महीने से यूक्रेन में है। परिजनों का उससे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। उसकी पत्नी, तीनों बच्चे, मां, विकलांग भाई सभी लगातार उसकी तलाश की गुहार लगा रहे हैं।मां को सता रही बेटे की चिंता गोकुलसिंह की मां हंजी देवी (64) ने बताया— मेरा बेटा पिछले कई समय से बाहर जाने की बात कर रहा था। वह एक बार तो सऊदी अरब भी गया था, लेकिन उसको वहां से वीजा अवधी खत्म होने के कारण जल्दी आना पड़ा। उसमें भी उसका नुकसान हो गया था। वहां से आने के बाद मकान आदि बनाया। इस कारण उस पर कर्जा हो गया।
एजेंट के जरिए गया था विदेश मां ने बताया— बेटे गोकुल ने वापस बाहर जाकर कमाने की ठानी, उसी के तहत हरियाणा के एक एजेंट से बातचीत हुई। एजेंट ने 13 सितम्बर 2025 को रशिया में एक टाइल्स फैक्ट्री में काम करने के लिए भेजा। वहां गोकुल कुछ समय रहा, इस बीच एक एजेंट से बातचीत हुई। उसने उनसे एक रशिया भाषा में लिखे पत्र पर हस्ताक्षर करवाकर यूक्रेन भेज दिया। उन्हें एजेंट ने लालच दिया कि 50 लाख रुपए 11 माह के दिए जाएंगे। रुस में एक बंगला व 10 बीघा जमीन दी जाएगी। यह कोई अकेला नहीं था, इसके साथ भारतीय मूल के करीब 60-65 लोग साथ में थे। इनमें से 25-30 लोग तो जैसे-तैसे करके निकल आये और रशिया सरकार ने उन्हें भारत सरकार के सुपुर्द कर दिया। शेष रहे करीब 32 लोगों में से 2 युवकों के मरे जाने की भी जानकारी मिली है। लेकिन मेरे बेटे को बार-बार फोन लगाने पर उससे अन्तिम बार 8 नवम्बर 2025 को उसकी पत्नी शांता देवी (33) से बातचीत हुई।
इस बातचीत में भी उसने यह बताया कि
तीनों बच्चों को दिखा दो और तुम अपना ध्यान रखना…. इसके बाद रोते हुए बस फोन काट दिया। वापस फोन लगाने की बहुत कोशिश की, लेकिन नहीं लगा।

हंजी देवी ने बताया कि
लगभग 1 महीने पहले बेटे गोकुल से अंतिम बार फोन पर बातचीत हुई थी। इसके बाद से उसका मोबाइल फोन लगातार स्विच ऑफ आ रहा है
कर्ज चुकाने के लिए गया था विदेश गोकुल सिंह की पत्नी शांता देवी ने बताया कि पति पर कर्जा हो गया था, जिसे चुकाने के लिए उन्होंने विदेश जाने का निर्णय लिया था। एक साल पहले भी वे सऊदी अरब गए थे, लेकिन विजिटर वीजा होने के कारण एक माह में ही लौटना पड़ा। इस दौरान काफी पैसा खर्च हो गया था। इसके बाद से वह बार-बार विदेश जाकर कमाने की इच्छा जताते रहे।
पत्नी के अनुसार
गांव के ही मित्र जसवंत सिंह से वे अपनी आर्थिक परेशानी साझा करते थे और विदेश जाकर कर्ज चुकाने की बात कहते थे। इसी सोच के चलते वे 13 सितंबर को दिल्ली रवाना हुए और हरियाणा के एक एजेंट ने उन्हें रूस भेजा।रूस पहुंचते ही फंस गए सेना में परिजनों ने बताया कि एजेंट ने गोकुल को सिक्योरिटी में लगाने की बात कही थी, लेकिन बाद में उन्हें रूसी आर्मी में भर्ती कर दिया गया। गोकुल सिंह रूस में टाइल्स फैक्ट्री में काम करना चाहते थे, लेकिन यूक्रेन सीमा क्षेत्र में पहुंचते ही उन्हें सेना की वर्दी पहना दी गई और आतंकवाद के खिलाफ मोर्चे पर तैनात कर दिया गया। गोकुल सिंह ने वर्दी पहने और हथियार लिए हुए अपनी तस्वीर परिवार को भेजी थी, जिससे परिजन घबरा उठे।





