देशभर में मौसम को लेकर लोगों के मन में लगातार सवाल बने हुए हैं। कहीं ठंड कम लग रही है तो कहीं अचानक कोहरा परेशानी बढ़ा रहा है। ऐसे में भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अलर्ट और विशेषज्ञों के पूर्वानुमान को समझना बेहद जरूरी हो जाता है। अगले 10 दिनों के मौसम को लेकर मौसम वैज्ञानिकों ने कई अहम संकेत दिए हैं, जो आम लोगों के साथ-साथ किसानों के लिए भी काफी महत्वपूर्ण हैं।
ठंड कम क्यों महसूस हो रही है, जबकि तापमान नीचे है?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार नवंबर और दिसंबर के दौरान उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में न्यूनतम तापमान सामान्य से 5 से 8 डिग्री सेल्सियस तक नीचे चला गया है। इंदौर, रीवा, अंबिकापुर, उत्तरी ओडिशा, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे क्षेत्रों में रात की ठंड साफ तौर पर दर्ज की जा रही है। इसके बावजूद लोगों को यह महसूस हो रहा है कि इस साल सर्दी उतनी तेज नहीं है।इसका मुख्य कारण दिन के समय अधिकतम तापमान का सामान्य या सामान्य से ऊपर बना रहना है। आसमान साफ रहने के कारण धूप तेज निकल रही है, जिससे दिन में गर्मी महसूस हो रही है। इसी वजह से लोगों को भ्रम हो रहा है कि ठंड कम है, जबकि वास्तविकता यह है कि रात की ठंडक पूरी तरह मौजूद है और कई जगहों पर तापमान काफी नीचे जा चुका है।
कोहरे का अलर्ट क्यों हुआ जारी?
हाल के दिनों में मौसम के मिजाज में बदलाव देखने को मिला है। हवा की दिशा में परिवर्तन हुआ है और बंगाल की खाड़ी से नमी वाली हवाएं उत्तर भारत की ओर बढ़ रही हैं। यही नमी दिल्ली, आगरा और आसपास के इलाकों तक पहुंच रही है, जिससे कोहरे की स्थिति बन रही है।
IMD ने इसी वजह से कई राज्यों के लिए अलर्ट जारी किया है। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली के लिए पीला यानी येलो अलर्ट जारी किया गया, जबकि उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में नारंगी यानी ऑरेंज अलर्ट लागू किया गया है। इसका मतलब है कि सुबह और देर रात घना कोहरा देखने को मिल सकता है, जिससे सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित हो सकता है।
पूर्वी भारत में ठंड क्यों हुई थोड़ी कम?
उत्तर दिशा से आने वाली ठंडी हवाओं के कमजोर पड़ने और बंगाल की खाड़ी से आ रही नम हवाओं के असर के कारण बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और पूर्वी उत्तर प्रदेश में ठंड में थोड़ी नरमी देखने को मिली है। इन इलाकों में रात का तापमान पहले के मुकाबले थोड़ा ऊपर गया है, जिससे कड़ाके की ठंड फिलहाल कम महसूस हो रही है।हालांकि शीतलहर की स्थिति पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। छत्तीसगढ़, ओडिशा, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में अभी भी ठंडी हवाओं का असर देखा जा रहा है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जब उत्तर-पश्चिम दिशा से ठंडी हवाएं फिर से तेज होंगी, तब मैदानी इलाकों में एक बार फिर कड़ाके की सर्दी लौटेगी।
दिसंबर की शुरुआत में रिकॉर्ड तोड़ ठंड
13 दिसंबर को हरियाणा के अंबाला में मैदानी इलाकों का सबसे कम न्यूनतम तापमान 1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। यह दिसंबर के शुरुआती पखवाड़े में दर्ज किया गया एक अहम रिकॉर्ड माना जा रहा है। इससे साफ है कि ठंड पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है, बल्कि उसका स्वरूप थोड़ा बदला हुआ है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस साल पश्चिमी विक्षोभ का ट्रैक भारत के उत्तरी हिस्सों से थोड़ा हटकर रहा है। इसके अलावा पोलर वॉर्टेक्स भी कमजोर रहा, जिसके कारण हिमालयी क्षेत्रों में वैसी भारी बर्फबारी अब तक नहीं हो पाई है जैसी आमतौर पर इस समय होती है।
पहाड़ों में कब बदलेगा मौसम?
मौसम विभाग के संकेतों के मुताबिक 14, 15 और 20 दिसंबर के आसपास पश्चिमी विक्षोभ का असर फिर से देखने को मिल सकता है। इस दौरान गिलगित-बाल्टिस्तान, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड के निचले और ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी की संभावना बन रही है।
अगर पहाड़ों में बर्फबारी होती है, तो उसके कुछ दिनों बाद मैदानी इलाकों में ठंडी हवाओं का असर तेज हो सकता है। इससे उत्तर भारत के राज्यों में तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है और ठंड का असर बढ़ सकता है।
अगले 10 दिनों में बारिश को लेकर क्या है अनुमान?
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 10 से 15 दिनों के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक या तेज बारिश की कोई बड़ी संभावना नहीं है। सर्दी के मौसम में आमतौर पर दिखाई देने वाले बादल, हल्की बारिश और लंबे समय तक छाया रहने वाला कोहरा इस बार फिलहाल कमजोर नजर आ रहा है।
इसका मतलब यह है कि मौसम शुष्क बना रह सकता है और बारिश का इंतजार लंबे समय तक करना पड़ सकता है। यही वजह है कि किसानों को मौसम के भरोसे न रहकर अपनी खेती से जुड़े फैसले समय पर लेने की सलाह दी जा रही है।
किसानों के लिए महत्वपूर्ण सलाह
मौसम विशेषज्ञों ने किसानों को खास तौर पर सतर्क रहने की सलाह दी है। रबी की फसलों के लिए यह समय बेहद अहम माना जा रहा है। जिन फसलों की बुवाई जल्दी हो चुकी है या पहली सिंचाई पहले ही दी जा चुकी है, उनके लिए दूसरी हल्की सिंचाई का यह सही समय बताया गया है।
चूंकि अगले कुछ दिनों में बारिश की संभावना कम है, इसलिए सिंचाई में देरी फसलों के विकास को प्रभावित कर सकती है। किसान अपनी फसलों की नमी की स्थिति को देखकर समय पर सिंचाई की योजना बनाएं।
पाले का खतरा कब बढ़ेगा?
मौसम विशेषज्ञों ने यह भी चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में जब तापमान दोबारा तेजी से गिरना शुरू करेगा, तब राजस्थान और हरियाणा के कुछ इलाकों में पाला पड़ने की स्थिति बन सकती है। पाले से फसलों को भारी नुकसान हो सकता है, खासकर सब्जियों और दलहनी फसलों को।
किसानों को सलाह दी गई है कि वे पाले से बचाव के उपाय पहले से तैयार रखें, जैसे हल्की सिंचाई करना, धुआं करना या अन्य स्थानीय उपाय अपनाना।
निष्कर्ष
अगले 10 दिनों का मौसम उतार-चढ़ाव भरा रहने वाला है। दिन में धूप और रात में ठंड का यह असामान्य संयोजन लोगों को भ्रम में डाल सकता है। कोहरे का असर कई राज्यों में यातायात को प्रभावित कर सकता है, जबकि पहाड़ी इलाकों में हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना बन रही है। किसानों के लिए यह समय सतर्कता और सही निर्णय लेने का है। मौसम की बदलती चाल पर नजर रखते हुए ही आने वाले दिनों की योजना बनाना सबसे समझदारी भरा कदम होगा।





