भिलाई। नगर निगम भिलाई की राजनीति के सशक्त स्तंभ और लोकप्रिय वरिष्ठ पार्षद वशिष्ठ नारायण मिश्रा का 56 वर्ष की आयु में 26 अगस्त को निधन हो गया। वे पिछले कुछ महीनों से अस्वस्थ चल रहे थे। उनके असमय चले जाने के समाचार से भिलाई शहर सहित पूरे राजनीतिक गलियारों में गहरा शोक व्याप्त है। नगर निगम सदन में जनहित के मुद्दों को बेबाकी और अध्ययन के साथ उठाने वाली एक प्रखर आवाज हमेशा के लिए खामोश हो गई। दिवंगत मिश्रा का अंतिम संस्कार 27 अगस्त को राम नगर स्थित मुक्तिधाम में संपन्न होगा।
सेक्टर-2, सड़क-6 के निवासी वशिष्ठ नारायण मिश्रा का भिलाई की स्थानीय राजनीति में एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड रहा है। नगर निगम भिलाई के गठन के पश्चात हुए सभी पांचों चुनावों में उन्होंने किसी राजनीतिक दल के बजाय निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरकर जीत हासिल की। बिना किसी पार्टी के समर्थन के लगातार पांच बार पार्षद चुना जाना क्षेत्र की जनता के बीच उनके अटूट विश्वास, गहरी पकड़ और लोकप्रियता को प्रमाणित करता है। उन्होंने निगम सदन में सेक्टर-1 और सेक्टर-2 क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।उनकी पहचान निगम अधिनियम के गूढ़ जानकार और अध्ययनशील नेता के रुप में रही। सदन की बैठकों में जब वशिष्ठ बोलना शुरू करते थे, तो पूरा सदन खामोशी से उन्हें सुनता था।
उन्हें नगर निगम अधिनियम के नियम व बिंदु कंठस्थ याद रहते थे। वे हमेशा ठोस अध्ययन और तैयारी के साथ सदन में अपनी बात रखते थे। तीन भाइयों में दूसरे नंबर के वशिष्ठ नारायण मिश्रा आजीवन अविवाहित रहे। शुरुआती दौर में वे कांग्रेस पार्टी से जुड़े और भिलाई नगर युवक कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। बीएसपी में टीए एवं टीओटी प्रशिक्षणार्थियों को रोजगार दिलाने और कोसा नाला टोल प्लाजा को बंद कराने के ऐतिहासिक आंदोलनों में उनकी केंद्रीय भूमिका रही। वर्ष 2016 के नगर निगम चुनाव में उन्होंने महापौर पद पर भी निर्दलीय चुनाव लड़कर अपनी राजनीतिक क्षमता प्रदर्शित की थी। उनके निधन पर शहर के विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, समाजसेवियों एवं नगर निगम के जनप्रतिनिधियों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे भिलाई के लिए अपूरणीय क्षति बताया है।
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