फेल और पास, दोनों ही जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। जहां सफलता इंसान को आगे बढ़ने का हौसला देती है, वहीं असफलता उसे अपनी कमियों से सीखने और दोबारा कोशिश करने का मौका देती है। कई लोग एक-दो बार नाकामी मिलने के बाद हार मान लेते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं जो बार-बार मिली असफलता को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि सफलता की सीढ़ी बना लेते हैं। हरियाणा के विजय वर्धन भी ऐसे ही शख्स हैं, जिन्होंने अपने सफर में 35 बार परीक्षाओं में रिजेक्शन का सामना किया, लेकिन कभी हार नहीं मानी। लगातार कोशिशों के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा को एक नहीं, बल्कि दो बार क्रैक किया। पहले IPS बने और बाद में अधिकारी बनकर अपने सपने को नई ऊंचाई दी। उनकी यह जर्नी आज उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो असफलताओं के बीच अपने लक्ष्य को पाने की कोशिश कर रहे हैं। आइए जानते हैं विजय वर्धन की संघर्ष से सफलता तक की पूरी कहानी।
हरियाणा के साधारण परिवार से आते हैं विजय वर्धन
विजय वर्धन हरियाणा के सिरसा जिले से ताल्लुक रखते हैं। उनका जन्म एक सामान्य परिवार में हुआ, लेकिन उनके सपने हमेशा बड़े रहे। उन्होंने कम उम्र में ही तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सेवा में जाकर देश की सेवा करनी है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और UPSC की तैयारी का सफर शुरू किया
BTech के बाद UPSC की तैयारी में जुटे
विजय वर्धन की शुरुआती शिक्षा हरियाणा में हुई। इसके बाद उन्होंने दिल्ली से इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांच में इंजीनियरिंग यानी BTech की पढ़ाई पूरी की। इंजीनियरिंग के बाद उनका रुझान प्राइवेट नौकरी की ओर नहीं था। वह सरकारी सेवा में जाना चाहते थे, इसलिए उन्होंने सिविल सेवा को अपना लक्ष्य बनाया। इसी सपने को पूरा करने के लिए विजय ने साल 2014 में UPSC की तैयारी शुरू कर दी।
35 बार मिली असफलता
UPSC की तैयारी के दौरान विजय वर्धन को एक के बाद एक कई असफलताओं का सामना करना पड़ा। उन्होंने करीब 35 सरकारी भर्ती परीक्षाओं में हिस्सा लिया, जिनमें HPSC, UPPSC, CGL और जैसी परीक्षाएं भी शामिल थीं। हालांकि, उन्हें बार-बार निराशा हाथ लगी। लेकिन हर असफलता के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों को पहचाना और उनमें सुधार करने पर काम किया। वह हर परीक्षा के अनुभव से कुछ नया सीखते और अगली कोशिश के लिए खुद को पहले से बेहतर तैयार करते रहे।
2018 में हासिल की UPSC में पहली सफलता
लगातार मेहनत और कई असफलताओं के बाद आखिरकार विजय वर्धन की मेहनत रंग लाई। साल 2018 में उन्होंने UPSC में सफलता हासिल की और ऑल इंडिया रैंक 104 प्राप्त की। उनकी रैंक के आधार पर उनका चयन IPS सेवा के लिए हुआ। हालांकि, विजय का लक्ष्य IAS अधिकारी बनना था। इसलिए IPS बनने के बाद भी उन्होंने अपने सपने का पीछा करना नहीं छोड़ा और UPSC की तैयारी जारी रखी।
2021 में IPS से बने IAS
विजय वर्धन की मेहनत आखिरकार एक बार फिर रंग लाई। साल 2021 में उन्होंने दोबारा UPSC CSE में सफलता हासिल की और इस बार IAS सेवा के लिए उनका चयन हुआ। इस तरह उन्होंने साबित कर दिया कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत जारी रहे तो बार-बार मिलने वाली असफलताएं भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं।
आखिरी दम तक कोशिश करते रहने की सीख
विजय वर्धन की कहानी बताती है कि सफलता से पहले असफलता के कई पड़ाव आ सकते हैं। 35 बार मिली नाकामी के बावजूद उन्होंने कोशिश करना नहीं छोड़ा और आखिरकार अपने मनचाहे मुकाम तक पहुंच गए। उनकी जर्नी उन लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सरकारी नौकरी और सिविल सेवा की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कहानी से यही सीख मिलती है कि मंजिल कितनी भी मुश्किल क्यों न हो, सपने को हासिल करने के लिए आखिरी दम तक कोशिश करते रहना चाहिए।





