पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने Hormuz Strait से गुजरने वाले तेल टैंकरों और अन्य जहाजों के लिए प्रस्तावित बीमा व्यवस्था को लेकर अमेरिका के साथ बातचीत की है. मामले से जुड़े एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, भारत इस प्रस्तावित मैकेनिज्म को लेकर स्पष्टता चाहता है. दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस सप्ताह कहा था कि US International Development Finance Corporation खाड़ी क्षेत्र में ऊर्जा और अन्य व्यापार की आवाजाही बनाए रखने के लिए जहाजों को बीमा कवरेज प्रदान करेगा. अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर हमले शुरू होने के बाद से तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है और क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है.दुनिया के कुल एनर्जी ट्रेड का लगभग पांचवां हिस्सा Hormuz Strait से होकर गुजरता है. ऐसे में इस मार्ग में किसी भी प्रकार की रुकावट का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर पड़ सकता है. भारत के लिए जोखिम और अधिक है क्योंकि देश के लगभग 40% कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से होता है. इस स्थिति का असर भारत की रिफाइनरियों पर भी दिखने लगा है. सरकारी कंपनी Oil and Natural Gas Corp. की इकाई Mangalore Refinery and Petrochemicals Ltd. ने कच्चे तेल की कमी के कारण अपनी एक क्रूड डिस्टिलेशन यूनिट अस्थायी रूप से बंद कर दी है.
स्थिति से निपटने के लिए भारत वैश्विक सरकारी तेल कंपनियों और ट्रेडर्स के साथ बातचीत कर रहा है ताकि उनके अंतरराष्ट्रीय भंडार से कच्चा तेल और एलपीजी खरीदा जा सके, जो Hormuz Strait के रास्ते से नहीं आता. अधिकारी ने नाम न देने की शर्त पर ये जानकारी दी है.हालांकि इस बाधा के बावजूद फिलहाल देश में कच्चे तेल और रिफाइंड उत्पादों का भंडार पर्याप्त है.
गैस की सप्लाई पर भी पड़ा असर
इस संकट का असर गैस मार्केट पर भी पड़ रहा है. QatarEnergy ने ईरानी ड्रोन हमलों के बाद अपने Ras Laffan संयंत्र में संचालन रोक दिया है, जो दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यात केंद्र माना जाता है.
भारत अपनी गैस जरूरतों का लगभग आधा हिस्सा आयात से पूरा करता है, जिसमें से करीब आधी आपूर्ति कतर से आती है. आपूर्ति बाधित होने के बाद भारत अब अन्य स्रोतों से Liquefied Natural Gas (LNG) खरीदने की कोशिश कर रहा है.
इसके अलावा सरकार घरेलू स्तर पर उत्पादित गैस की बिक्री को भी प्राथमिकता के आधार पर पुनर्व्यवस्थित करने की योजना बना रही है. मौजूदा नीति के अनुसार घरेलू गैस की आपूर्ति में घरेलू उपभोक्ताओं, ऑटोमोबाइल सेक्टर और उर्वरक उद्योग को सबसे पहले प्राथमिकता दी जाती है





