छत्तीसगढ़

पुलिस मुख्यालय रायपुर के आदेश के परिपालन में तथा पुलिस अधीक्षक कबीरधाम धर्मेन्द्र सिंह (IPS) के निर्देशानुसार आज दिनांक 08.01.2026 को थाना तरेगांव जंगल क्षेत्र के अपराध

 

पुलिस मुख्यालय रायपुर के आदेश के परिपालन में तथा पुलिस अधीक्षक कबीरधाम धर्मेन्द्र सिंह (IPS) के निर्देशानुसार आज दिनांक 08.01.2026 को थाना तरेगांव जंगल क्षेत्र के अपराध क्रमांक 32/2019 धारा 3, 5 विस्फोटक पदार्थ अधिनियम 1908 एवं धारा 38(2) विधिविरुद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1967 के अंतर्गत जप्त विस्फोटक सामग्री का सुरक्षित नष्टीकरण किया गया।

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र बघेल एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अमित पटेल के मार्गदर्शन में उक्त प्रकरण में जप्त 05 नग इलेक्ट्रॉनिक डेटोनेटर एवं टॉप टाइगर बम (पटाखा) को बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड (BDS) टीम द्वारा निर्धारित सुरक्षा मानकों एवं मानक संचालन प्रक्रिया का पूर्ण पालन करते हुए सुरक्षित स्थान पर नियंत्रित ढंग से नष्ट किया गया।

उक्त कार्रवाई हेतु पुलिस अनुविभागीय अधिकारी बोड़ला अखिलेश कौशिक को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया था। उनके नेतृत्व में गठित बीडीएस टीम में सउनि रूपराम पट्टावी, चौकी दशरंगपुर (प्रभारी बीडीएस), प्रधान आरक्षक 317 अखिलेश्वर सिंह थाना कुण्डा, आरक्षक 675 आकाश सिंह थाना भोरमदेव, आरक्षक 150 संदीप पनागर थाना अजाक तथा ट्रेड आरक्षक 793 गुलेन्द्र गेन्ड्रे (डॉग स्क्वाड सहित) शामिल रहे।

नष्टीकरण की संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान आमजन की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई तथा क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस बल की तैनाती कर आवश्यक सतर्कता सुनिश्चित की गई।
समझ गया। नीचे उसी **स्पष्टीकरण भाग** को संशोधित कर रहा हूँ, जिसमें IED और नक्सली उपयोग की बात भी संतुलित, तथ्यात्मक और प्रेस-उपयुक्त भाषा में जोड़ी गई है:

*क्या होता है डेटोनेटर*

डेटोनेटर एक अत्यंत संवेदनशील विस्फोटक उपकरण होता है, जिसका उपयोग आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) सहित अन्य विस्फोटक उपकरणों को सक्रिय करने के लिए किया जाता है। इस प्रकार के डेटोनेटरों का उपयोग प्रायः नक्सली एवं अन्य उग्रवादी संगठनों द्वारा सुरक्षा बलों को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से किया जाता रहा है।

डेटोनेटर हल्के झटके, घर्षण, तापमान परिवर्तन अथवा असावधानी से भी विस्फोटित हो सकता है, जिससे सुरक्षा बलों के जवानों, आम नागरिकों तथा सार्वजनिक संपत्ति के लिए गंभीर और जानलेवा खतरा उत्पन्न हो सकता है। विशेषकर जंगल एवं दुर्गम क्षेत्रों में गश्त, तलाशी एवं अभियान के दौरान इस प्रकार के विस्फोटक अत्यधिक जोखिमपूर्ण होते हैं।

इसी कारण जप्त विस्फोटक सामग्री का निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप समय पर सुरक्षित नष्टीकरण किया जाना अत्यंत आवश्यक होता है, जिससे किसी भी संभावित दुर्घटना अथवा जान-माल की क्षति को रोका जा सके।

Manoj Mishra

Editor in Chief

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